जान होती तो कटने से पहले आवेदन जरूर लगा लेता : चांपा मुख्य मार्ग का निर्जीव कटा हुआ पेड़, शायद किसी अधिकारी को रहम आ जाती…अब कार्रवाई कौन करेगा?

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वासु सोनी चांपा। देश में अनेक भ्रष्टाचार के मामले उजागर हो रहे है तो वहीं इसके पीछे आम लोगों में जागरूकता फैलाने की कमी रह जाती है। आखिर भ्रष्टाचार कैसे किया जाता है इस पर भी एक विशेष अभियान की शुरूआत की जानी चाहिए।
आपको बता दें कि चांपा नगर में कैसे अधिकारी कर्मचारियों की मनमानी चल रही है। बीते दिनों कैसे मुख्य मार्ग में एक पेड़ काट दिया गया। जिसकी जांच तो क्या नगर के किसी अधिकारी और कर्मचारी या यह कह सकते है कि जिले के किसी अधिकारी कर्मचारी को इसकी जानकारी तक नहीं है। जिससे यह प्रतीत होता है कि नगर में कोई भी, कभी भी, कुछ भी कर सकता है लेकिन नगर के अधिकारी कर्मचारी इसकी जानकारी होने के बाद भी कुछ नहीं कर पा रहे यही भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा उदाहरण माना जा सकता है?
नगर में इन दिनों किसी भी स्तर के अधिकारी कर्मचारी सिर्फ अपनी जेब गर्म होने वाले मामलों पर ही अधिक ध्यान देते नजर आ रहे है। जिस मामले में कुछ नहीं हो सकता उस मामले पर संज्ञान लेना भी गुनाह समझ रहे है? बीते दिनों खुलेआम बैरियर चौक के पास पेड़ काट दिया गया लेकिन उसकी खबर सोशल मीडिया में प्रकाशित होने और जिले कलेक्टर, वन विभाग के डीएफओ, चांपा नगर के एसडीएम समेत तमाम अधिकारी कर्मचारी गहरी निद्रा में चले गए है। शायद उस पेड़ में जीव नहीं होना ही सबसे बड़ा गुनाह था, जो आम जनता को भरी गर्मी में आरामदायक हवा दे रही थी। उस पेड़ का सबसे बड़ा गुनाह था कि वह रोड के किनारे किसी को परेशान नहीं कर रहा था। नगर और उस पेड़ की बदकिस्मती माने जो नगर के प्रथम नागरिक के सामने आ गया। अब संभवतः लोगों को समझ जाना चाहिए कि पेड़ की तरह नगर भी कटने के रास्ते पर तो नहीं है?
बहरहाल कटे हुए पेड़ की आत्मा भी चीख चीख कर रही होगी कि कोई तो आवेदन लगा दो शायद कार्रवाई हो जाए? लेकिन जिले में भ्रष्टाचार के शहद में डूबे अधिकारी कर्मचारियों को शायद ही उस पेड़ की चीख सुनाई दे रही होगी। अब देखने वाली बात यह होगी कि किस अधिकारी में दमदारी है जो कार्रवाई की बात आगे बढ़ाए? शायद मामला ठंडे बस्ते में जा चुका है?

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