
जीवित भू-विस्थापितों को कागजों में मृत दर्शाकर रोजगार हड़पने का आरोप, 30 सितंबर को नगर निगम कोरबा का महाघेराव
एसईसीएल कुसमुंडा के पीड़ित विस्थापित किसानों (रामरतन एवं भोला) के कूट-रचित मृत्यु प्रमाण-पत्रों पर प्रशासन की चुप्पी के खिलाफ उग्र हुआ आंदोलन
सामाजिक कार्यकर्ता गणपत शर्मा ने सांसद पूर्व विधायक, श्रमिक-किसान संगठनों एवं पत्रकारों से माँगा सहयोग
फर्जी मृत्यु प्रविष्टियाँ निरस्त करने व जालसाजों पर FIR की मांग
वासु सोनी कोरबा। दक्षिण पूर्व कोयला क्षेत्र लिमिटेड (एसईसीएल) कुसमुंडा एवं दीपका कोयला परियोजनाओं हेतु अपनी कृषि भूमि देने वाले वास्तविक भू-विस्थापितों के अधिकारों पर डाका डालने का एक अत्यंत संवेदनहीन व आपराधिक मामला सामने आया है। पीड़ित विस्थापित किसान रामरतन पिता जेठू एवं भोला पिता गिरधारी के अधिकृत प्रतिनिधि व आरटीआई एक्टिविस्ट गणपत शर्मा ने कोरबा जिला कांग्रेस कमेटी पूर्व विधायक सांसद जनप्रतिनिधियों, और सामाजिक संगठनों को पत्र जारी कर जनहित के इस मुद्दे पर नैतिक समर्थन व सक्रिय सहभागिता की अपील की है।
क्या है पूरा प्रकरण?
गणपत शर्मा ने बताया कि एसईसीएल कुसमुंडा परियोजना में अधिग्रहित भूमियों के एवज में मिलने वाले पुनर्वास रोजगार व आर्थिक मुआवजे को हड़पने हेतु भू-माफिया एवं बिचौलिया सिंडिकेट ने सशरीर जीवित भू-स्वामियों (रामरतन एवं भोला) के नाम से नगर पालिक निगम कोरबा से कूट रचना मृत्यु प्रमाण-पत्र बनवा लिए। तत्पश्चात, फर्जी वंशावली के आधार पर विस्थापित कोटे की नौकरियां और अधिकार अपात्र बिचौलियों को हस्तांतरित कर दिए गए।
26 वर्षों से चल रहा खेल
पीड़ित किसान अत्यंत सीधे और अशिक्षित हैं, जिन्हें बिचौलियों द्वारा लगातार यह कहकर अंधेरे में रखा गया कि नौकरी की प्रक्रिया जारी है। हाल ही में आरटीआई के माध्यम से जब इस जालसाजी का खुलासा हुआ, तो तत्काल विधिक कदम उठाए गए। उच्चतम न्यायालय के स्थापित सिद्धांतों के अनुसार, कूट-रचना के आधार पर किया गया कोई भी कृत्य प्रारंभ से ही शून्य होता है और यह एक ‘निरंतर जारी रहने वाला संज्ञेय अपराध’ है, जिस पर परिसीमा का कोई नियम लागू नहीं होता।
तहसीलदार के पत्र के बाद भी नगर निगम मौन
तहसीलदार कटघोरा द्वारा पत्र क्रमांक 982/तह./वाचक-1/2026 (दिनांक 11.09.2026) के माध्यम से जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 15 के तहत कूट-रचित मृत्यु प्रमाण-पत्रों को निरस्त करने हेतु निर्देशित किए जाने के बावजूद नगर निगम कोरबा प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
30 सितंबर को नगर पालिक निगम कोरबा का महाघेराव
प्रशासनिक उपेक्षा के खिलाफ प्रभावित परिवारों एवं किसान-मजदूर संगठनों द्वारा आंदोलन का ऐलान किया गया है। 30 सितंबर 2026 बुधवार सुबह 11 बजे से नगर पालिक निगम कार्यालय परिसर, कोरबा छत्तीसगढ़ का घेराव किया जाएगा। जहां मुख्य मांगों के रूप में जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम की धारा 15 के तहत कूट-रचित मृत्यु प्रमाण-पत्रों का तत्काल निरस्तीकरण सहित फर्जी दस्तावेज बनाने वाले षड्यंत्रकारियों व झूठे गवाहों पर बीएनएस 2023 के तहत आपराधिक एफआईआर दर्ज किया जाए। वही एसईसीएल में फर्जीवाड़े के आधार पर प्राप्त रोजगारों की उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच (SIT/CBI) एवं वास्तविक विस्थापितों के अधिकारों की बहाली की जाए।
सामाजिक कार्यकर्ता गणपत शर्मा ने की अपील…
“यह लड़ाई केवल दो किसानों की नहीं, बल्कि अपनी जमीन देश के विकास के लिए देने वाले उन तमाम निर्बल ग्रामीणों के अस्तित्व और मानवाधिकारों की रक्षा का धर्मयुद्ध है। हम कोरबा के सांसद पूर्व विधायक जनप्रतिनिधियों, किसान-श्रमिक संगठनों और मीडिया जगत से अपील करते हैं कि 30 सितंबर को प्रातः 11 बजे नगर निगम कोरबा के समक्ष पहुंचकर इस जनहित की आवाज को बुलंद करें।
गणपत शर्मा ने स्पष्ट किया कि नगर निगम कोरबा एवं राज्य प्रशासन में वर्तमान में सत्तारूढ़ भाजपा (सत्ता पक्ष) का नियंत्रण है और इस घोटाले में प्रशासनिक अधिकारियों व सत्ता संरक्षण की भूमिका जांच के दायरे में है। अतः सत्ता पक्ष से किसी समर्थन की आशा न होने तथा आंदोलन को सरकारी दबाव से मुक्त रखने हेतु विपक्ष, स्वतंत्र जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों व मीडिया से सीधे सहयोग की अपील की गई है।


