
वासु सोनी चांपा। जांजगीर चांपा जिले के जीएसटी विभाग के अधिकारी कर्मचारियों की पढ़ाई को लेकर लोगों में शंका व्याप्त है। आवेदन लेने वाले कर्मचारियों द्वारा आवेदन में क्या लिखा है यह आवेदन लेने के बाद पूछा जाता है? जिससे जीएसटी कर्मचारियों के पढ़ाई को लेकर शंका को स्थिति बन रही है।
आपको बता दें कि जांजगीर चांपा जिले के जीएसटी विभाग में जब कोई आवेदनकर्ता या प्रार्थी किसी विषय को लेकर विभाग में आवेदन देने पहुंचता है तो कर्मचारियों में कुछ ऐसे भी है जिन्हें कुछ जानकारी ही नहीं है बल्कि वे आवेदनकर्ता से ही पूछते है कि आवेदन में क्या लिखा है। जिसके यहां प्रतीत हो रहा है कि जिले के जीएसटी विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों की पढ़ाई या उनके पढ़ाई से संबंधित दस्तावेजों की पूर्ण जांच कर सार्वजनिक की जाए। जिससे आम जनता को यह पता चल सके कि आवेदन लेने और देने वाला कितना शिक्षित है?
जीएसटी विभाग के अधिकारी कर्मचारी नहीं कर पा रहे बिना जीएसटी दुकानों की जांच?
संभवतः कुछ ऐसे ही कारणों से जिले में राजस्व की कमाई रुकी हुई है। जिले के जीएसटी विभाग के अशिक्षित अधिकारी और कर्मचारियों के कारण ही जिले में जीएसटी से आने वाले राजस्व की कमाई रुक सी गई है। बिना शिक्षा के जीएसटी का मूल्यांकन किया ही नहीं जा सकता। वही अधिकारी और कर्मचारियों के द्वारा क्या कार्य किया जा रहा है। यह जानकारी भी जनता को नहीं मिल पा रही है। चूंकि जीएसटी विभाग जांजगीर चांपा के अधिकारी और कर्मचारियों का मानना है कि लोकहित से इनका कोई लेना देना नहीं है। जीएसटी की राशि सिर्फ व्यापारी और विभाग के बीच का मामला है, जिसके चलते किसी भी जन को इसके बारे में कोई भी जानकारी नहीं दी जा सकती। वही जिले में जीएसटी की उचित जांच नहीं पाना अधिकारी और कर्मचारियों की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहा है?
बहरहाल अब देखना यह है कि जांजगीर चांपा का जीएसटी कैसे कार्य करता है? क्या जीएसटी विभाग के उच्च अधिकारी जिले के अधिकारी और कर्मचारियों पर उचित कार्रवाई कर पाएंगे या यह मामला भी दबा दिया जाएगा?


