
विश्व स्वास्थ्य संगठन ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन जामनगर परियोजना के आय व्यय और ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
आरटीआई कार्यकर्ता विकास शर्मा ने आयुष मंत्रालय, विश्व स्वास्थ्य संगठन और शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों को भेजा आधिकारिक ईमेल,
वित्तीय पारदर्शिता न होने पर उठाए गंभीर सवाल
वासु सोनी नई दिल्ली/जांजगीर-चांपा। गुजरात के जामनगर स्थित विश्व स्वास्थ्य संगठन ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन तथा नई दिल्ली स्थित साउथ ईस्ट एशिया रीजनल ऑफिस के संचालन हेतु भारत सरकार द्वारा आवंटित बड़ी बजट वाली राशि के पारदर्शी उपयोग को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
जांजगीर-चांपा (छत्तीसगढ़) के प्रमुख आर.टी.आई. एवं सामाजिक कार्यकर्ता विकास शर्मा ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व, आयुष मंत्रालय (भारत सरकार) के सचिव तथा संबंधित उच्च प्रशासनिक अधिकारियों को एक पत्र सह ईमेल भेजकर सार्वजनिक धन के उपयोग में पूर्ण स्वच्छता और विस्तृत पारदर्शिता की मांग की है।
करदाताओं के $1.7 करोड़ डॉलर लगभग (₹140 करोड़) के बजट का मामला
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा इस महत्वाकांक्षी अंतरराष्ट्रीय केंद्र के लिए $17,000,000 (लगभग ₹140 करोड़) का वित्तीय आवंटन किया गया है। चूंकि यह निधि भारत के आम नागरिकों और करदाताओं का पैसा है, इसलिए इसका पाई-पाई का हिसाब सार्वजनिक होना संवैधानिक एवं प्रशासनिक जवाबदेही का हिस्सा है।
मद-वार खर्च की अनुपलब्धता
संबंधित विभागों द्वारा केवल एक संक्षिप्त वित्तीय सारांश उपलब्ध कराया गया है। इस सारांश से यह स्पष्ट नहीं होता कि इस विशाल धनराशि का उपयोग किन-किन विशिष्ट मदों जैसे—अनुसंधान, अधोसंरचना, प्रशासनिक व्यय, या यात्रा में किस प्रकार किया गया है।
कैग/बाहरी ऑडिट रिपोर्ट उजागर करने का आग्रह
आयुष मंत्रालय और विश्व स्वास्थ्य संगठन मिलकर जामनगर ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन एवं साउथ ईस्ट एशिया रीजनल ऑफिस दिल्ली के खर्चों से संबंधित संपूर्ण यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट और नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक या किसी स्वतंत्र ऑडिट संस्था की रिपोर्ट को आधिकारिक वेब पोर्टल पर सार्वजनिक करें।

प्रशासकीय नोडल अधिकारियों की भूमिका और मांग
प्रशासनिक अधिकारियों और जन सूचना अधिकारी का मुख्य दायित्व सार्वजनिक निधियों के पारदर्शी प्रबंधन को सुनिश्चित करना है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ हस्ताक्षरित समझौतों के तहत भारत के बजटीय योगदान की विस्तृत जानकारी जनता की पहुंच में रखना सुशासन का मूल सिद्धांत है।
अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय निकायों को प्रतिलिपि प्रेषित
यह आधिकारिक ईमेल विश्व स्वास्थ्य संगठन के अंतरराष्ट्रीय निदेशकों, आयुष मंत्रालय के सचिव, जेनेवा स्थित भारतीय स्थायी मिशन तथा प्रमुख जनप्रतिनिधियों को आवश्यक कार्रवाई एवं संज्ञान हेतु प्रेषित किया गया है।

एक एक रुपए का जनता को दें पारदर्शी हिसाब : विकास शर्मा
हम पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान का स्वागत करते हैं, परंतु जब इस कार्य में देश की जनता का ₹140 करोड़ जैसा बड़ा बजट शामिल हो, तो उसकी गोपनीयता या अस्पष्टता स्वीकार्य नहीं है। केवल एक पन्ने का सारांश देना वित्तीय पारदर्शिता नहीं कहलाता। हमारी मांग है कि प्रशासन और विश्व स्वास्थ्य संगठन मिलकर एक-एक मद का ब्योरा और ऑडिट रिपोर्ट जनता के सामने पारदर्शी रूप से प्रस्तुत करें।


