
वासु सोनी चांपा। रेलवे स्टेशन चांपा में स्थापित जीआरपी चौकी सिर्फ खानापूर्ति के लिए बनाया गया है। चांपा जीआरपी में 9 लोगों की तैनाती है लेकिन स्टेशन पहुंचने पर जीआरपी का कोई स्टाफ दिख जाए तो कोई बड़ी बात नहीं। स्टेशन में जब भी कार्रवाई की जाती है तो जीआरपी में कार्यरत स्टाफ आरपीएफ से जानकारी लेने की बात कहते फिरते है जबकि कई मामले में कार्रवाई करने की पूरी जवाबदारी जीआरपी की होती है। वही दूसरी ओर स्टेशन में जीआरपी थाने के पास से गुजरने पर ये पता नहीं चलता है कि कोई स्टाफ वहां है भी या नहीं। बाहर से दरवाजा या लोहे की ग्रील थोड़ी सी खुली रख ये दिखाया जाता है कि जीआरपी में कार्यरत स्टाफ वहां मौजूद है लेकिन वास्तविकता तब सामने आती है जब दरवाजा खोल कर देखा जाए। जनता के बीच से शायद ही कोई ऐसा कोई व्यक्ति हो जो ये हिमाकत करे और जीआरपी थाने का दरवाजा खोल कर देखे कि आखिर अंदर चलता क्या है? सूत्रों ने बताया कि जीआरपी थाने में अधिकतर समय स्टाफ नदारत रहते है। जब कोई बड़ी घटना हो जाती है वहां भी जब जीआरपी की जरूरत हो तभी वे पहुंचते है अन्यथा कोई भी जीआरपी का स्टाफ स्टेशन परिसर में दिखते भी नहीं है। सूत्रों ने बताया कि कई बार जीआरपी थाने के भीतर ताश भी खेलते देखा गया है? जिससे यही प्रतीत होता है कि जीआरपी थाने के अधिकतर स्टाफ अपनी सहूलियत के हिसाब से कार्य करते है उन्हें जनता के कार्यों से कोई लेना देना नहीं है। चांपा रेलवे स्टेशन में जीआरपी की कई जिम्मेदारियां है बावजूद वे अपनी जिम्मेदारियों से भागते नजर आते है। अगर किसी ने शिकायत कर भी दी तो वे यही कहते फिरते है कि कुछ नहीं होने वाला जहां चाहे वहां शिकायत कर सकते हो। बहरहाल चांपा रेलवे स्टेशन के जीआरपी चौकी के अधिकारी कर्मचारियों की कार्यशैली समझ से परे है कि आखिर वो कितना काम, कब, कहां और कैसे करते है? फिलहाल शिकायत के बिना जीआरपी चौकी पर कार्रवाई हो ये संभव नहीं है। अब देखना यह है कि समाचार प्रकाशन के बाद उच्च अधिकारी संज्ञान ले पाते है या यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा।


