
वासु सोनी चांपा। नगर पालिका परिषद चांपा के द्वारा लगभग 12 सितंबर 2020 को एक निविदा किया गया। निविदा तो हो गया लेकिन जिसे निविदा मिला उसने स्क्रैप ही नहीं उठाया। आखिर स्क्रैप नहीं उठाने के पीछे का कारण क्या है? नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी-कर्मचारी हमेशा ही अंजान बनकर फायदा उठाना चाहते है लेकिन यह समझ से परे है कि आखिर 4 साल बीत जाने के बाद भी स्क्रैप का ये मामला ठंडे बस्ते में क्यों चला गया। क्यों नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी कर्मचारी इस मामले पर संज्ञान नहीं ले पाए? आखिर स्क्रैप का निविदा कितने में और किसे हुआ था, इसकी भी जानकारी लेने पर वे फाइल देखकर बताने की बता करते है। नगर पालिका परिषद चांपा को इससे कोई नुकसान हुआ है या नहीं ये तो समय बताएगा, लेकिन स्क्रैप बेचने के मामले में लापरवाही क्यों की जा रही है? वहीं पत्रकारों द्वारा स्क्रैप मामले के बारे में अधिकारी को बताने पर दोबारा निविदा की प्रक्रिया की बात कही जा रही है। क्या इस मामले में जिस ठेकेदार ने निविदा उठाया क्या उसके जमा किए गए रूपयों को राजसात किया जाएगा या ठेकेदार को हमेशा के लिए ब्लैक लिस्ट की श्रेणी में डाला जाएगा। फिलहाल नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी-कर्मचारी अपनी ही मर्जी से काम करेंगे। उन्हें जनता या जनता से जुड़े मुद्दे को लेकर कोई सरोकार नहीं है। अब देखना यह होगा कि नगर पालिका परिषद चांपा में स्क्रैप मामले में नगर पालिका परिषद चांपा सहित जिले के कौन से अधिकारी कार्रवाई कर पाते हैं। फिलहाल अधिकारियों के बातचीत से यही जाहिर होता है कि यह मामला भी ठंडे बस्ते में जा सकता है।

