बाउंड्रीवाॅल है या ताजमहल? आखिर कितने वर्षों में होगा तैयार, नगर पालिका के अधिकारी-कर्मचारी कर रहे खानापूर्ति? जिले के उच्च अधिकारी शायद ही ले पाए संज्ञान…

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वासु सोनी चांपा। नगर पालिका परिषद चांपा में कोई अधिकारी-कर्मचारी सही समय पर कोई काम कर दे तो दुनिया का आठवां अजूबा माना जा सकता है। नगर के प्रतिष्ठित स्थान रामबांधा तालाब के सामने बने गांधी भवन और अंबेडकर भवन की सुरक्षा के लिए उनके चारों ओर बाउंड्रीवाल का निर्माण करना था लेकिन नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी-कर्मचारी और ठेकेदार की लापरवाही से निर्माण कार्य बीच में ही रोक दिया गया। नगर की जनता यही सोच रही कि आखिर ठेका मिलने के बाद ठेकेदार ने बीच में कार्य क्यों रोक दिया? नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारियों से जब इस बारे में चर्चा की गई तो उन्होंने संबंधित लोगों से पूछ कर बताया कि बाउंड्रीवाल निर्माण के दौरान अंबेडकर भवन के पीछे की ओर दलदल भरे स्थान होने के कारण बाउंड्रीवाल निर्माण रोक दिया गया लेकिन यह समझ नहीं आया कि आखिर दो साल बीत जाने के बाद भी दलदल भरे स्थान को स्लैग च्यूरी से पूरी तरह क्यों पाटा नहीं गया? आखिर किस निजी व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से यह निर्माण रोक दिया गया। जनता के बीच से बार बार यही आवाज उठती है कि नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी-कर्मचारी कहीं अपना स्वयं का लाभ लेने के लिए ऐसा तो नहीं कर रहे। लेकिन ये बाते चरितार्थ रूप लेने लगती है जब आप स्वयं इसका जायजा लेने या इन बातों को अधिकारी-कर्मचारी से पूछने जाएं तो वे कहते है हो जाएगा काम, क्या दिक्कतें है, लेकिन काम आखिर तब होगा जब अधिकारी कर्मचारियों की जेबे गर्म ना हो जाए। फिलहाल कई बार इस संबंध में जानकारी ली गई तो नपा के इंजीनियर ने सिर्फ दिखावे के लिए ठेकेदार को काम चालू करने कह दिया। अब देखना यह है कि आखिर यह बाउंड्रीवाल कब तक खड़ा हो पाएगा या यह मामला फिर से ठंडे बस्ते में चला जाएगा? वहीं जनता के रूपयों का दुरूपयोग करना कोई नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी-कर्मचारियों से सीखें।

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