समाचार लगाकर, क्या उ…. लिया? प्रमोशन तो हो गया है कहीं और चले जाएंगे, जीआरपी में काम कैसे होता कोई मुझसे सीखे…

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चांपा। जी हां खबर की हेडिंग पढ़कर तो आप समझ ही गए होंगे कि शासकीय रेलवे पुलिस चांपा में कार्यरत अधिकारी-कर्मचारियों की शैली किस लायक है? कुछ दिन पहले बिहान खबर में लगे समाचार ‘‘जीआरपी चैकी मतलब आराम ही आराम, वरना काम ही काम…चांपा रेलवे स्टेशन का मामला…‘‘ 18 मई 2025 को प्रकाशित की गई थी। जिसे लेकर शासकीय रेलवे पुलिस के अधिकारी-कर्मचारी कुछ ज्यादा ही नाराज हो गए, जिससे उन्होंने स्टेशन पहुंचे बिहान खबर के पत्रकार को कह डाला कि ‘‘समाचार लगाकर, क्या उ…. लिया? प्रमोशन तो हो गया है कहीं और चले जाऐंगे…‘‘ जिससे यह प्रतीत होता है कि शासकीय रेलवे पुलिस के अधिकारी कर्मचारियों का भारत देश की जनता कुछ नहीं कर सकती। जिसके चलते उन्होंने पत्रकार को ही ऐसे शब्द कह डाले। वहीं दूसरी ओर शासकीय रेलवे पुलिस का दायरा सुरक्षा की दृष्टि से बहुत दूर तक है लेकिन उच्च अधिकारियों की नजर चांपा रेलवे स्टेशन की ओर पड़े तो शायद जनता खुशनसीब बन जाए लेकिन शासकीय रेलवे पुलिस सिर्फ खानापूर्ति के लिए ही है। कभी कभार अगर स्टेशन में काम कर भी लें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। क्योंकि स्टेशन में दिन भर की थकान के बाद आराम ना मिले तो शासकीय रेलवे पुलिस की नौकरी किस काम की? बहरहाल चांपा रेलवे स्टेशन में शासकीय रेलवे पुलिस के उच्च अधिकारियों की नजरे करम कर जाए तो सुरक्षा में कुछ बढ़ोत्तरी हो जाए।

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