
वासु सोनी चांपा। नगर पालिका परिषद चांपा में सूचना के अधिकार के तहत अंतिम 29वें दिन जवाब भेजा जाता है जो 30 दिन बीत जाने के बाद दो-तीन दिन बाद आवेदक के पास पहुंचता है। वहीं सूचना के अधिकार का जवाब भी संतुष्टिपूर्ण नहीं दिया जाता है। आपको बता दें कि नगर पालिका परिषद चांपा के सूचना के अधिकार विभाग का भी कोई अता पता नहीं है। शायद सरकार उन्हें आराम से बैठे बैठे काम करने का वेतन दे रही है। जी हां आप अगर नगर पालिका परिषद चांपा पहुंच जाएं तो सूचना के अधिकार के तहत जानकारी लेना टेढ़ी खीर साबित हो रही है। आखिरकार शासकीय कर्मचारियों का कौन क्या बिगाड़ सकता है। एक प्रार्थी ने सूचना के अधिकार का जवाब नहीं मिलने और कर्मचारियों द्वारा बार बार जानकारी देने के लिए बुलाकर जानकारी नहीं देने से नाराज होकर प्रधानमंत्री शिकायत पोर्टल में शिकायत भी कर दी। बावजूद शासकीय सेवक का कौन क्या बिगाड़ सकता है कि स्कीम के चलते शायद प्रार्थी को लाभ मिल सके? लेकिन अंत में प्रार्थी द्वारा हार नहीं मानते हुए बार-बार शिकायत करने का मन बना लिया गया है। हरिवंशराय बच्चन जी की कहावत है ‘‘कोशिश करने वालों की हार नहीं होती’’ के तर्ज पर शिकायत की जा रही है और अब देखना यह कि नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी-कर्मचारी कब तक शासकीय सेवक का कौन क्या बिगाड़ सकता है कि स्कीम पर चलते नजर आते हैं?



नगर पालिका परिषद चांपा में सूचना के अधिकार के तहत जवाब देने की प्रक्रिया बहुत ही धीमी और असंतोषजनक है। आवेदकों को जवाब मिलने में काफी समय लगता है, और जब मिलता भी है तो वह संतुष्टिपूर्ण नहीं होता। सूचना के अधिकार विभाग का कोई स्पष्ट पता नहीं है, जिससे आवेदकों को काफी परेशानी होती है। कर्मचारियों का रवैया भी बहुत ही लापरवाह और उदासीन लगता है। क्या सरकारी कर्मचारियों को इस तरह के काम करने के लिए वेतन देना उचित है? WordAiApi