
चांपा। नगर पालिका परिषद चांपा में इंजीनियरों की भर्ती इसलिए की गई है ताकि वे नगर के कार्यों को व्यवस्थित तरीके से पूर्ण करवा सके। लेकिन नपा के ठेकेदारों से मिलकर वे सिर्फ खानापूर्ति करते नजर आते हैं। साथ ही नपा चांपा के अधिकारियों के संरक्षण में नगर के विकास कार्य को ग्रहण लग चुका है। नगर में चल रहे निर्माण कार्य स्तरहीन होने के बावजूद इंजीनियर, सब इंजीनियर उन कार्यों को सही बताकर अपना पल्ला झाड़ते नजर आते हैं। नगर की जनता को पता है कि नगर में स्तरहीन निर्माण कार्य हो रहे हैं लेकिन शिकायत के अभाव में नपा चांपा के इंजीनियर, सब इंजीनियर घटिया स्तर के कार्यों को सही बताकर अपना पल्ला झाड़ ले रहे हैं। नपा इंजीनियरों को जानकारी है कि शिकायत के बाद उन्हें इतना समय जरूर मिल जाता है जिससे वे स्तरहीन कार्यों पर लीपापोती आसानी से कर सके। वहीं नगर की जनता द्वारा जानकारी देने के बाद भी नपा चांपा के अधिकारी, इंजीनियर, सब इंजीनियर व कर्मचारी शिकायत कर देने की बात कहते फिरते हैं। जिससे यह पता चलता है कि जिले के उच्च वर्ग के अधिकारियों के संरक्षण में और अधिकारी ठेकेदारों के सांठगांठ से नगर में हो रहे विकास कार्य की गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। वहीं नपा चांपा पीडब्ल्यूडी विभाग के बाबू द्वारा दस्तावेज सही होने का हवाला देकर दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया जाता। साथ ही पीडब्ल्यूडी विभाग के बाबू द्वारा जो करना है कर लेना वाला धमकी भरा लहजा प्रार्थियों को दिया जाता है। शायद निर्माण कार्य के गुणवत्ता की पोल खुल जाने के डर से बाबू ऐसी हरकते करते नजर आता है। दस्तावेज मांगे जाने पर नपा चांपा पीडब्ल्यूडी विभाग के बाबू को नियमों की जानकारी नहीं होने के बाद भी जबरन नियमों का हवाला देकर प्रार्थीयों को बाहर का रास्ता दिखाया जाता है।
नपा चांपा के कर्मचारियों की दादागिरी चरम पर…
नगर पालिका परिषद चांपा के कर्मचारी की शिकायत जनता से छुपी नहीं है लेकिन जिले के उच्च वर्ग के अधिकारी मामले को दबाने पीछे नहीं रहते। शिकायत के बावजूद प्रार्थी को जानकारी देना तो दूर, अपने कर्मचारी को संरक्षित करते हुए शिकायती मामलों को दबा देने की कला उच्च वर्ग के अधिकारियों से सीखी जा सकती है। नगर पालिका परिषद चांपा में ऐसी कई शिकायतें प्रार्थियों ने कर रखी है जिसकी जानकारी देना तो दूर शिकायत की बात करना भी कोई मुनासिब नहीं समझता। वहीं नियम से दस्तावेज मांगने पर प्रार्थी को आवेदन की समय सीमा के अंत में जानबुझकर दिया जाता है जिससे कर्मचारियों को अपने बचाव का रास्ता ढूंढने अधिक समय मिल सके। कई बार तो आरटीआई का जवाब भी नहीं दिया जाता। अधिकारी और कर्मचारियों की मिलीभगत से जनता की समस्या लगातार बढ़ते जा रही है।


