विकास की पानी सहित फिसलन भरी गली और भारत का चौथा नंबर…बरसात में कुरदा गांव में मिल सकता है स्वीमिंग और बोटिंग का लाभ

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वासु सोनी चांपा। कभी-कभी लगता है कि भारत की अर्थव्यवस्था ‘चौथे नंबर’ पर नहीं, चौथे गियर में है, लेकिन गाड़ी की स्टेयरिंग कहीं और घूम रही है। इस देश की चमकती जीडीपी की चकाचौंध में एक गांव है कुरदा। जो जांजगीर-चांपा जिले के नक्शे पर तो है, लेकिन शायद शासन की नजर में अभी भी ड्राफ्ट मोड पर है। चांपा से महज 15 मिनट की दूरी पर बसा कुरदा गांव 21वीं सदी में नहीं, बल्कि जलयुग में जी रहा है। यहां की सड़कों पर बारिश के बहते पानी को देखकर सहसा ही प्रतीत होता है कि स्वर्ग से मां गंगा उतरकर सीधा कुरदा के रोड पर आ गई है। वहीं जिले के नौकरशाह अपनी नौकरी ऐसे कर रहे हैं जैसे करोड़ों-अरबों की राशि देकर नौकरी पाई हो। आम जनता तो यह कहती है कि जिले के नौकरशाहों को सिर्फ और सिर्फ कमीशन रूपी देवता ही नजर आते हैं, रही बात जनता की तो भगवान भरोसे तो सब चल ही रहा है।


सड़क नहीं, जलपथ है… कोई तो ध्यान दे दो साहब…
कुरदा गांव में कहने को तो सड़क है, लेकिन बरसात के समय यहां नदी जैसा माहौल बन जाता है। सड़कों पर पानी जहाज भी चलाया जा सकता है। बीती रात पानी की झड़ी ने कुरदा गांव में हुए विकास कार्यों की पोल खोल कर रख दी। साथ ही यह भी बता कि गांव के विकास में कमीशनबाजी का खेला भी तगड़ा हुआ है। यहां सड़कें सूखी कब दिखती हैं, ये गांव के बुजुर्गों को भी याद नहीं। साल के बारह माह गांव की सड़कों का यही हाल रहता है। चाहे जितने भी विकास कार्य हो जाए, कमीशनबाजी के चक्कर में पानी हमेशा रोड पर ही जमा रहता है। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि जांजगीर चांपा जिले के जनप्रतिनिधि और उच्च वर्ग के अधिकारी सिर्फ कागजों में ही खेल खेलते हैं जबकि सामने जाने पर सच्चाई कुछ और ही बयां करती है।


बहरहाल आपको यह जानना जरूरी है कि ये वही अधिकारी होते हैं जो अपनी सेवा के शुरूआती दिनों में जनता के प्रति सच्ची श्रद्धा रखते हुए उनके समस्याओं के निराकरण करने की कसमें खाते नजर आते हैं लेकिन नौकरी शुरू होते ही कमीशन रूपी दानव कसमें वादों को दीमक की तरह चाट जाते हैं। जिसके चलते गांवों के विकास की यही हालत हो जाती है। फिलहाल बरसात अत्यधिक होने पर चांपा के नजदीक स्थित कुरदा गांव में स्वीमिंग और बोटिंग का लाभ अवश्य ही लिया जा सकता है। जिले के अधिकारी कुछ करें या ना करें लेकिन स्वीमिंग और बोटिंग के लिए गांव का भ्रमण कर उचित व्यवस्था बनाने पहल कर सकते हैं।

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