
वासु सोनी चांपा। नगर पालिका परिषद चांपा में आरटीआई का आवेदन देने के बाद नपा के कर्मचारी अपनी मर्जी से आरटीआई का जवाब देते है। जब नपा कर्मचारी की मर्जी हो आवेदन का निराकरण करते है और कर्मचारी का मन नहीं होने की स्थिति में कर्मचारी आवेदन की कोई जानकारी नहीं देते। साथ ही नियमों का हवाला ऐसे देते है जैसे आम जनता के लिए ही नियम बनाया गया हो। कर्मचारियों के लिए कोई नियम नहीं बना है। वहीं कर्मचारी अधिकारी के संरक्षण में कहीं भी शिकायत कर लेने की बात कर जनता को चलता कर देते है। नगर पालिका परिषद चांपा की स्थिति किसी से छुपी नहीं है लेकिन जिले के उच्च अधिकारी या फिर यह कहे कि कलेक्टर को भी इस बात की जानकारी होने के बाद भी अफसरशाही का राज चलाया जा रहा है। जिसके कारण आए दिन जनता सिर्फ एक दूसरे के मुंह ताकते बैठे रहती है।
नगर पालिका परिषद चांपा में अधिकारी राज, बाबू राज और कर्मचारी राज हावी हो रखा है। नगर पालिका परिषद चांपा पहुंचने पर सीएमओ के कार्यालय नहीं पहुंचने पर कर्मचारी आराम फरमाते रहते है। अगर सीसीटीवी कैमरे की जांच की जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा लेकिन अगर सीसीटीवी कैमरा चालू रहेगा तब? नगर पालिका चांपा में कार्यरत शासकीय सेवक यही जानते है कि उन्हें शासन काम करने का पैसा देती है लेकिन नगर पालिका चांपा में उसके विपरीत काम हो रहा है। भारत देश की उच्च वर्ग के अधिकारी इसकी जांच करें तो शायद जनता के सामने सच का खुलासा हो। लेकिन ये शायद ही संभव हो क्योंकि ये पैसा बोलता है! फिलहाल नगर पालिका परिषद में नौकरशाहों का राज आसानी से देखा जा सकता है उसमें भी धमकी भरे लहजे में कि कोई भी आ जाए या कही भी शिकायत हो जाए हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता? जनता के पैसे पर शासकीय सेवकों का राज करना यही सब दर्शाता है। अब देखना यह है कि नगर पालिका परिषद में कोई जांच की कार्रवाई होती है या ये पैसा बोलता है?


