जांजगीर चांपा जिले के नहर विभाग का भ्रष्टाचारी आतंक चरम पर, न्यायालय जाओगे तो सबूत कहां से लाओगे…क्या प्रार्थी को न्याय मिलेगा या भ्रष्टाचार जीत जाएगा?

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जांजगीर-चांपा। अगर आप जांजगीर चांपा जिले के नहर विभाग में जा रहे हैं तो आपको कोई लाभ नहीं मिल पाएगा? क्योंकि विभाग के सभी अधिकारी भ्रष्टाचार की सारी सीमाएं लांघ चुके हैं? नहर विभाग के अधिकारी खुलेआम आम जनता को चुनौतियां पेश करते हैं। हमने आपको पिछले अंक में बताया था कि कैसे नहर विभाग के अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय क्रमांक 01 के एसडीओ पी के तिवारी द्वारा बलपूर्वक अपने कर्मचारीरूपी गुंडों को सामने बैठाकर प्रार्थियों/आवेदकों को सूचना के अधिकार के तहत लगाए आवेदन का अवलोकन करने मजबूर किया जाता है। वहीं सबूतों का अभाव बताकर नहर विभाग के सभी अधिकारी-कर्मचारी मिलकर प्रार्थी/आवेदनकर्ता को उग्र कार्यवाही के लिए मजबूर करते हैं।
आपको बता दें कि प्रार्थी के द्वारा सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी गई थी। जिसके अवलोकन के लिए प्रार्थी को नहर विभाग के अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय क्रमांक 01 के एसडीओ पी के तिवारी द्वारा अवलोकन के लिए बुलाकर अपमानित किया गया था। जिसकी शिकायत प्रधानमंत्री शिकायत सेल में प्रार्थी ने लगाई थी। प्रधानमंत्री शिकायत सेल में शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। जिससे यही लगता है कि अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय के एसडीओ पी के तिवारी का केन्द्रीय शासन में अच्छी पकड़ है जिसके चलते वे इन सारे मामलों को दबाने में काफी महारत हासिल कर चुके हैं। वहीं दूसरी ओर नहर विभाग के ईई शशांक सिंह द्वारा भी कोई जवाब तलब नहीं किया जा रहा है। जिससे यह प्रतीत होता है कि नहर विभाग भ्रष्टाचार के साथ साथ उच्च वर्ग की सेटिंग बनाकर जिले में अपना वर्चस्व बना चुका है। जांजगीर चांपा जिले में नहर विभाग के मामले में आम जनता को कुछ भी हासिल नहीं हो सकता, ना ही कोई कार्रवाई किसी काम आ सकती है। जिले के आम जनता को इससे आगे न्यायालय का सहारा भी लेना पड़ सकता है। लेकिन क्या जिस विभाग के अधिकारियों की सेटिंग केन्द्रीय स्तर पर हो वहां न्यायालय से आम जनता को लाभ मिल पाएगा? यह सोचने वाली बात होगी। वहीं दूसरी ओर नहर विभाग में जिले के ईई शशांक सिंह से प्रार्थी ने जब मुलाकात की तो उन्होंने इस मामले में किसी भी प्रकार की कार्रवाई करने से साफ इंकार कर दिया। साथ ही मौखिक रूप से यह भी कह दिया कि न्यायालय में जाने के बाद भी सबूत कहां से लाआगे? जिससे यह साफ तौर पर प्रतीत होता है कि प्रार्थी या आम जनता को नहर विभाग की भ्रष्टाचार की कोई जानकारी कहीं से उपलब्ध नहीं कराई जा सकती। अधिकारियों की मानें तो दस्तावेज लेने प्रार्थी या आम जनता को न्यायालय का सहारा लेना पड़ेगा? तब कहीं जाकर नहर विभाग से कोई दस्तावेज मिल पाएगा। अन्यथा सूचना के अधिकार के अंतिम छोर तक सिर्फ पेनाल्टी देकर मामले को रफा दफा भी किया जा सकता है?
फिलहाल प्रार्थी ने मामले की शिकायत राष्ट्रपति से करने की मंशा बनाई है अब देखना यह कि क्या प्रार्थी को इस मामले में न्याय मिल पाएगा या जांजगीर नहर विभाग के अधिकारियों का भ्रष्टाचार रंग लायेगा?

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