वासु सोनी जांजगीर चांपा। जिले में शनिवार, रविवार की छुट्टी के बाद सोमवार को सभी विभाग का काम शुरू होता है लेकिन जांजगीर चांपा जिले में सोमवार को समय सीमा की बैठक होती है। जिसके चलते जिले के सभी अधिकारी कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित रहते है। वहीं अधिकारियों के अपने कार्यालय में नहीं रहने का पूरा फायदा कर्मचारियों द्वारा उठाया जाता है। आम जनता से कोई जिले के किसी विभाग में चला जाए तो वहां के कर्मचारियों द्वारा अधिकारी का नहीं होने का हवाला देते हुए उन्हें चलता कर दिया जाता है। विभाग के अधिकारी से मोबाइल में संपर्क करने पर वे सुबह से लेकर शाम तक फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझते। जिससे साफ स्पष्ट हो जाता है कि जिले के विभागों में अधिकारी राज हावी हो चुक है। वहीं किसी के द्वारा शिकायत की जाती है तो उस विभाग के अधिकारी द्वारा आम जनता का काम ही नहीं किया जाता बल्कि उन्हें और अधिक परेशान किया जाता है। जिले व नगर की जनता को समय समय पर यही कहते सुना जा सकता है कि अधिकारी कर्मचारी को छुट्टी का इतना ही मोह है तो नौकरी करने क्यों आते है।
फिलहाल अधिकारी कर्मचारी भी छुट्टी के हकदार है लेकिन आमजन के कार्यों को आधे अधूरे रूप में छोड़कर अधिकारी कर्मचारी आखिर क्या बताना चाहते है। कभी कभार तो अधिकारी और कर्मचारियों को कहते सुना जा सकता है कि हम भी इंसान है, हमे भी छुट्टी चाहिए, लेकिन यह समझ से परे है कि छुट्टी के बाद भी जनता का काम पूरा क्यों नहीं हो पाता, आखिर इसके जिम्मेदार कौन है, और वे जनता को आधे अधूरे हालत में क्यों छोड़ देते है?

