

वासु सोनी चांपा। नगर में चल रहे अवैध कामों में अधिकारियों की संलिप्तता लगातार बढ़ते नजर आ रही है? जिसका ताजा उदाहरण हनुमान धारा पर्यटन स्थल में हुए मिट्टी मुरूम खनन का देखा जा रहा है। जिस पर चांपा में स्थित वनमण्डल का कार्यालय उदासीन बैठा है? क्या वनमण्डल के अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है या वनमण्डल के अधिकारी कर्मचारी किसी बड़े मामले का खात्मा करने की तैयारी कर रहे है?
चांपा नगर में आए दिन अधिकारी कर्मचारियों की लापरवाही सामने आ रही है। जिसमें जिले के अधिकारियों की संलिप्तता नजर आ रही है। जिले के उच्च अधिकारियों के संरक्षण के बिना कोई भी कनिष्ठ अधिकारी नगर विकास में बाधा नहीं बनता? लेकिन चांपा नगर में अधिकारियों द्वारा नगर विकास में बाधा बनना आसानी से देखा जा सकता है। नगर का एकमात्र स्टेडियम भालेराव मैदान अपनी बदहाली पर आंसु बहा रहा है। जिसके जिम्मेदार कोई और नहीं बल्कि चांपा नगर के अधिकारी कर्मचारी है। खुलेआम भालेराव मैदान में घास के ऊपर मिट्टी पाटकर भालेराव मैदान को दलदल में तब्दील कर दिया गया है। जिसकी लिखित दस्तावेज नगर तो क्या जिले के अधिकारियों के पास भी उपलब्ध नहीं है? आखिर किसकी अनुमति से भालेराव मैदान को मिट्टी और काली मुरूम डालकर पाट दिया गया है। वहीं हनुमान धारा पर्यटन स्थल में मुरूम की खुदाई कर पेड़ो को नष्ट कर दिया गया। लेकिन चांपा स्थित वनमण्डल के कार्यालय और वहां के अधिकारी और कर्मचारियों ने आंख मूंद रखी है? जिसके चलते अवैध काम करने वालों के हौसले बुलंद है? क्या छोटे से नगर में केंद्रीय राजनीति और संरक्षण की संलिप्तता हो सकती है? अधिकारी और कर्मचारी इन मामलों पर गंभीर क्यों नहीं है। कही सांठ गांठ की आजमाइश तो नहीं कि गई। फिलहाल भालेराव मैदान और हनुमान धारा में खुलेआम हुए अवैध कार्यों की जांच कौन करेगा? अब देखना यह है कि बिना शिकायत जिले के अधिकारी कर्मचारी इस मामले में कोई ठोस कदम उठा पाएंगे या इस मामले में अवैध काम करने वालों को और अधिक बल मिलेगा?


