भवनों की राजस्व वसूली लेकिन व्यवस्था जीरो…. आखिर क्यों नहीं सुधर पा रही व्यवस्था… कर्मचारियों की लापरवाही या मनमानी

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वासु सोनी चांपा। एक ओर नगर पालिका परिषद चांपा द्वारा अनेक भवनों को किराए पर देकर राजस्व का लाभ कमाया जा रहा है लेकिन उन्हीं भवनों से प्राप्त राजस्व से भवन का कायाकल्प करने के बजाय भवन को उजाड़ स्थिति में रखने नगर पालिका के कर्मचारी कोई कसर नहीं छोड़ रहे है। ताजा उदाहरण चांपा नगर पालिका परिषद के गांधी भवन और आंबेडकर भवन का देखा जा सकता है। गांधी भवन में श्रीमद भागवत कथा का आयोजन चल रहा है। जिसके लिए कोसमंदा गांव के सोनी परिवार के द्वारा गांधी भवन किराए पर लिया गया है। वहीं जब से किराए पर लिया गया है गांधी भवन को खामियों से परिवार के लोग परेशान है। सबसे पहले तो भवन की साफ सफाई की जिम्मेदारी पालिका की जवाबदारी बनती है जिसके लिए कई बार पालिका के कर्मचारियों को सोनी परिवार के लोगों के द्वारा फोन लगाया गया लेकिन उनके द्वारा कोई भी व्यवस्था नहीं की गई। साथ ही भवन में बिजली संबंधित अनेक समस्याएं थी जिस पर पालिका के अधिकारी और कर्मचारियों को सूचना मिलने के बाद भी कोई उचित कार्रवाई नहीं की गई। साथ ही गांधी भवन में चल रहे आयोजन के लिए दरवाजे का बंद नहीं होना सबसे बड़ी समस्या थी। जिसका समाधान भी नगर पालिका के अधिकारी और कर्मचारियों के द्वारा नहीं किया गया। अंततः सोनी परिवार के द्वारा स्वयं के खर्चे से दरवाजे की मरम्मत कराई गई। जिससे साफ प्रतीत होता है कि नगर पालिक परिषद चांपा के अधिकारी और कर्मचारी राजस्व की वसूली के लिए तो आतुर रहते है लेकिन व्यवस्था के नाम पर सिर्फ दिखावा किया जाता है। फिलहाल सोनी परिवार के द्वारा लगातार व्यवस्था के लिए नगर पालिक परिषद चांपा के अधिकारी और कर्मचारियों को संपर्क किया जाता है लेकिन वे फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझते। जिससे भागवत कथा करवा रहे परिवार काफी परेशान नजर आ रहे है। वहीं शनिवार और रविवार की छुट्टी और फिर सोमवार को समय सीमा की बैठक के चलते नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी और कर्मचारी मिल जाए तो शायद श्रीमद भागवत कथा का आयोजन करवा रहे सोनी परिवार की समस्या का समाधान हो जाए।

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