
वासु सोनी जांजगीर चांपा। जिले में त्यौहार के आते ही मिठाई दुकान की चांदी ही चांदी हो जाती है। मिठाई के मानक अमानक स्तर की जांच कौन करेगा? जिले में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग उन्हीं दुकानों में जांच करने पहुंचती है जहां उन्हें अधिक फायदा नजर आता है। चाहे वह छत्तीसगढ़ सरकार के खजाने में जाए या अधिकारियों की जेब में जाए। दोनों ही स्तर में आम जनता के सेहत से खिलवाड़ करना कोई ऐसे अधिकारियों से सीखे?
आपको बता दें कि त्यौहार के नजदीक आते ही जिले सहित नगर में हर एक दुकान के बाद मिष्ठान भंडार खुल जाते हैं जहां कई प्रकार की मिठाई बेची जाती है। नगर सहित दूर दराज से पहुंचे लोग कम ज्यादा की उम्मीद में मिठाई खरीद लेते हैं लेकिन मिठाई की गुणवत्ता पर सवाल उठता है। सिर्फ एक दो दिन चल जाएगा कहकर अमानक मिठाई पूरे नगर सहित जिले भर में बेच दिया जाता है। लेकिन जिले के खाद्य विभाग के उच्च अधिकारी सिर्फ हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं। वे यह भी जांच करने नहीं जाते कि मिठाई मानक है या अमानक? अगर कही मिठाई जांच करने चले भी जाए तो उस मिठाई के मानक अमानक की रिपोर्ट मिठाई के खत्म होने के बाद आती है और मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की बात करें तो उन्हें भी शायद शिकायत का इंतजार रहता है कि कोई आए और शिकायत करे, बिना शिकायत वे कार्रवाई कर भी नहीं पाते। आखिर शासकीय सेवक जो ठहरे। उन्हें जनता की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं रहता। हर साल यही सिलसिला बदस्तूर जारी रहता है। जो विभाग के नाक के नीचे संचालित होता है।


