छुट्टी, छुट्टी और छुट्टी, जनता का काम समय पर पूरा, फिर विभागों में पेंडेंसी काम किसके कारण? क्या जनता को मिल पाएगा इसका जवाब? आखिर इतने मीटिंग के बाद काम पेंडिंग क्यों?

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वासु सोनी चांपा। गुरुवार को भाई दूज की स्थानीय छुट्टी दी गई थी लेकिन किसी कारणवश छुट्टी निरस्त कर दी गई। बावजूद जिले के विभागों में सन्नाटा पसरा रहा। जिले के अधिकतर विभागीय अधिकारी कर्मचारी भाई दूज के त्यौहार मनाते रहे। वहीं काम से पहुंचे लोगों को सिर्फ भटकना पड़ा। अब अचानक से छुट्टी निरस्त होने के कारण अधिकारी कर्मचारी भी क्या कर सकते है? गलती तो छुट्टी का आदेश जारी करने वाले अधिकारी की मानी जाएगी, लेकिन छुट्टी तो छुट्टी है, सभी ने भाई दूज मना भी लिया। लेकिन जो जनता परेशान हुई उनका क्या? क्या जनता के विभाग पहुंचने और परेशान होने का जिम्मा जिले की किस अधिकारी कर्मचारी की होगी? ऐसी तमाम बातें है जो शासकीय सेवक निभा रहे है। गुरुवार को जब जल संसाधन विभाग के चांपा स्थित कार्यालय किसी जानकारी के लिए पहुंचे तो वहां उपस्थित एक कर्मचारी ने बताया छुट्टी का आदेश था लेकिन अचानक शाम को आदेश निरस्त होने पर अधिकारी कर्मचारी कैसे उपस्थित हो सकते है? अब आप ही सोचिए कि छुट्टी निरस्त होने के बाद भी अधिकारी कर्मचारी छुट्टी मनाते रहे। वही भाई दूज की जगह अन्य दिन छुट्टी का आदेश निकाला गया, अब अधिकारी कर्मचारी उस दिन भी छुट्टी मनाएंगे, जिससे यही प्रतीत होता है कि पूरे साल सिर्फ छुट्टी ही घोषित कर देना चाहिए। कम से कम जनता परेशान तो नहीं होगी?

छुट्टी, छुट्टी और छुट्टी, आखिर काम कब होगा?

आपको बता दें कि 17 अक्टूबर से ही जिले शासकीय छुट्टी का माहौल निर्मित हो गया था। जिसमें 18 अक्टूबर शनिवार को धनतेरस, 19 अक्टूबर रविवार को रूप चौदस, 20 अक्टूबर सोमवार को दीपावली, 21 अक्टूबर मंगलवार को भी लगभग छुट्टी, 22 अक्टूबर बुधवार को गोवर्धन पूजा, 23 अक्टूबर गुरुवार को भाई दूज, 24 अक्टूबर शुक्रवार समय सीमा की बैठक, 25 अक्टूबर शनिवार छुट्टी, 26 अक्टूबर रविवार छुट्टी, 27 अक्टूबर सोमवार समय सीमा की बैठक मिलकर लगभग 10 दिनों तक शासकीय कार्यालयों में छुट्टी के वातावरण है और रहेगा? यहां आपको यह बताना लाजिमी होगा कि शनिवार, रविवार छुट्टी के बाद सोमवार को समय सीमा की बैठक होने की वजह से अधिकारी बैठक में रहते है जिसके कारण पूरे जिले के विभागों में कर्मचारी लगभग छुट्टी ही मनाते है, क्योंकि जनता से कोई भी विभाग पहुंचता है तो उसे कर्मचारियो का कमरा या तो खाली मिलता है या अधिकारी नहीं है का जवाब मिलता है। कुल मिलकर देखा जाए तो शासकीय अधिकारी और कर्मचारियों को सिर्फ छुट्टी की चिंता रहती है बाकी अगर कोई काम पेंडिंग है तो उसको जवाबदारी लेने वाला जिले, प्रदेश या देश में भी नहीं है।

फिलहाल अधिकारी कर्मचारियों की छुट्टी बेहद जरूरी मानी जाती है क्योंकि वे जन सेवा, जनहित में लगातार जुटे रहते है उनके पास जनता की सेवा छोड़ शायद ही दूसरा काम रहता होगा? बावजूद विभागों में काम की पेंडेंसी किसके कारण होती है ये सोच का विषय है जबकि जनता का पूरा काम तुरंत ही निपटा दिया जाता है।

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