
वासु सोनी चांपा। सोचिए अगर नगर के बीच बस्ती में नशे का व्यापार खुलेआम बेखौफ चल रहा है तो इसका मतलब यह है कि कोई भी नशे का का व्यापार बड़ी ही आसानी से कर सकता है? क्योंकि ये हम नहीं कहते आप खुद ही देखकर समझ सकते है। देवांगन पारा स्थित हनुमान चौक में सुबह से लेकर शाम तक खुलेआम गांजा का व्यापार चल रहा है।

हनुमान मंदिर के आसपास घरों में पुलिस विभाग के किसी ईमानदार अधिकारी और कर्मचारी द्वारा उचित जानकारी प्राप्त कर जांच की जाए तो हो सकता है कि जरूरत से ज्यादा नशे का सामान मिल जाए? वही दूसरी ओर पान दुकान बंद कर आधी रात तक सिगरेट, गुटका, पाउच जैसे पान दुकान की तमाम वस्तुएं बिक रही है लेकिन अधिकारी कर्मचारी की सांठ गांठ भी जबरदस्त है कि कार्रवाई तक नहीं हो पा रही है। जिले के सभी वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी होने के बाद भी लगता है कि सांठ गांठ बड़ी तगड़ी है? जिसके चलते इन दुकानों को बंद करवाने के बजाय संरक्षण के ऊपर संरक्षण मिल रहा है। आखिर इन नशे के व्यापारियों द्वारा कहां तक सांठ गांठ है कही केंद्रीय स्तर का संरक्षण तो नहीं। सीधे शब्दों में कहा जा सकता है कि एक करेला तो दूसरा नीम चढ़ा। मतलब मोहल्ले के लोगों को इस नशे के व्यापार से शायद ही मुक्ति मिल पाए। वहीं अगर किसी व्यक्ति की इससे भी अधिक सांठ गांठ हो तो वे भी इस व्यापार में अपनी साख अवश्य जमा सकते हैं?


