
वासु सोनी चांपा। नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी और कर्मचारियों की बात करें तो नगर की जनता से सिर्फ आवेदन देने कहते है और जब आवेदन दे देते है तब उसका जवाब मिलने आवेदनकर्ता को चक्कर काटने पड़ते है? सूचना के अधिकारी की जानकारी लेने और देने के मामले में तो नगर पालिका चांपा के अधिकारी और कर्मचारियों को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री पुरस्कार से सम्मानित करना चाहिए।
आपको बता दें कि हनुमान धारा पर्यटन स्थल मामले में एक साल से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी और एक सीएमओ का तबादला हो जाने के बाद भी सूचना के अधिकार के तहत जानकारी देने नगर पालिका के अधिकारी कर्मचारी कुख्यात आरोपियों की भांति दस्तावेज छुपाते ही जा हैं वहीं समय बीत जाने के बाद कही कर्मचारी ना फंस जाए इसलिए प्रभार भी बदल दिया गया, बावजूद एक कर्मचारी प्रेम व्यवहार की बात करते हैं तो दूसरा कर्मचारी समय बीत जाने के बाद भी फ्री दस्तावेज देने के बदले दस्तावेज के रुपए के लिए आवेदनकर्ता को पत्र भेज रहे है? आखिर ये समझ नहीं आ रहा कि बिना पढ़े लिखे अधिकारी कर्मचारियों को नगर पालिका परिषद चांपा की जिम्मेदारी क्यों दी जा रही है?
आवेदनकर्ता सिर्फ नगर पालिका परिषद चांपा के चक्कर काटने मजबूर हैं तो वहीं जिले के कलेक्टर भी मजे लेने भी मजे ले रहे हैं, जिले के कलेक्टर ने ही हनुमानधारा पर्यटन स्थल की नींव रखी लेकिन नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी और कर्मचारी सहित जिम्मेदारों ने लगभग 3 करोड़ का वारा न्यारा करने का पूरा मन बना लिया है। जिससे यह प्रतीत हो रहा है कि जिले के कलेक्टर ने ही आदेश जारी कर रखा होगा कि आवेदनकर्ताओं से सिर्फ आवेदन लो और उसका जवाब मत दो?
बहरहाल सूचना के अधिकारी की धज्जियां उड़ाते नगर पालिका परिषद चांपा में आसानी से देखा जा सकता है। शायद इसके पीछे जिले के कलेक्टर और सूचना के अधिकार से संबंधित जिम्मेदारों ने कमान सम्हाल रखी है। अब देखना यह है कि नगर पालिका परिषद चांपा के अधिकारी कर्मचारी और जिम्मेदारों से हनुमान धारा के 3 करोड़ की पर्यटन स्थल को विकसित करने और बंदरबाट करने की व्यवस्था कैसी होगी? फिलहाल विश्वस्त सूत्रों ने यह तक कह डाला कि कही खबरों में नाम रोशन करने ऐसा तो नहीं किया जा रहा? जिम्मेदार जवाब दे पाएंगे या आवेदनकर्ता नगर पालिका के चक्कर काटते रहेंगे देखने वाली बात होगी?


